7 अक्टूबर के तीन साल बाद: कहानी अब कौन सुना रहा है?
एक पाकिस्तानी पत्रकार लिखती हैं कि ग़ज़ा की तबाही ने दुनिया की नज़र बदल दी, और फ़िलिस्तीनियों ने अपनी बात ख़ुद कहना सीख लिया।
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में इसराइल में क़रीब 1,200 लोग मारे गये और 250 से ज़्यादा बंधक बनाये गये। तब दुनिया की हमदर्दी इसराइल के साथ थी।
मुना ख़ान के मुताबिक़ तीन साल की ग़ज़ा जंग ने ये तस्वीर पलट दी। हर कार्रवाई को पीड़ित होने की नज़र से देखने की इसराइली दलील अब असर खो चुकी है। लोग ये मानने को तैयार नहीं कि हमास की निंदा के लिए फ़िलिस्तीनियों के दर्द पर चुप रहना ज़रूरी है।
बदलाव की बड़ी वजह ये है कि फ़िलिस्तीनी पत्रकार और आम लोग अपनी तबाही ख़ुद दर्ज कर रहे हैं। विदेशी पत्रकारों को रोका गया, और 191 फ़िलिस्तीनी पत्रकार इसराइली हमलों में मारे जा चुके हैं।
2026 के प्यू सर्वे में 36 देशों के 67 फ़ीसदी लोग इसराइल के बारे में नकारात्मक राय रखते हैं, अमेरिका में भी 60 फ़ीसदी। लेखिका मानती हैं कि इससे घर दोबारा नहीं बनेंगे, पर इसराइल का ये भरोसा टूट गया है कि दुनिया उसकी कहानी आंख मूंद कर मान लेगी।
ये सार देशकाल का अपना लेखन है। मूल लेख के सारे अधिकार Dawn के पास हैं।