हमारी संपादकीय नीति
देशकाल दुनिया भर की ज़रूरी संपादकीय टिप्पणियों को, चाहे वे किसी भी भाषा में हों, सहज हिंदुस्तानी ज़बान में पाठकों तक पहुंचाता है। हम हर टिप्पणी का अपना सार लिखते हैं और मूल लेख का लिंक देते हैं, ताकि पाठक पूरा लेख वहीं पढ़ सकें।
हमारी प्राथमिकता
हमारे लिए अवाम की आवाज़ सबसे अहम है। ख़ास कर अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों, विमुक्त और घुमंतू (डीएनटी) समुदायों, महिलाओं, मज़दूरों, किसानों और हाशिये पर धकेले गये लोगों का हित हमारे चुनाव की पहली कसौटी है।
हम किन बातों को आगे रखते हैं
- सांप्रदायिक सद्भाव और गंगा-जमुनी तहज़ीब
- संविधान, नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी
- जाति-विरोधी विमर्श और सामाजिक न्याय
- मज़दूर, किसान और असंगठित क्षेत्र के हक़
- पर्यावरण और जलवायु न्याय, जल-जंगल-ज़मीन का सवाल
- LGBTQ+ और विकलांग लोगों के अधिकार
- संघीय ढांचा, भाषाई विविधता और क्षेत्रीय आवाज़ें
- दक्षिण एशिया में अमन और ग्लोबल साउथ का नज़रिया
हम क्या नहीं छापते
- नफ़रत फैलाने वाली या किसी समुदाय को निशाना बनाने वाली सामग्री
- बिना सबूत के दावे और अफ़वाह
- निजी हमले
- किसी भी सरकार या राजनीतिक दल का प्रचार
- सनसनीखेज़ लेख
- ऐसे स्रोत जिनके लेख पढ़ने के लिए सब्सक्रिप्शन ज़रूरी हो
पारदर्शिता
हर पन्ने पर साफ़ लिखा होता है कि ये सार है, मूल लेखक और प्रकाशन कौन हैं, और मूल लेख कहां पढ़ा जा सकता है। मूल लेखों के सारे अधिकार उनके लेखकों और प्रकाशकों के हैं। तस्वीरें या तो देशकाल के अपने कोलाज हैं, या खुले लाइसेंस वाली, क्रेडिट के साथ।
ग़लती सुधार
अगर किसी सार में कोई तथ्य ग़लत है, तो हम उसे सुधारते हैं और पन्ने पर सुधार का ज़िक्र करते हैं।