रूस से दोस्ती की पाकिस्तानी उम्मीद, और भारत की लंबी परछाईं
इस्लामाबाद में SCO की बैठक से पहले एक पाकिस्तानी सुरक्षा विशेषज्ञ पूछते हैं कि क्या मॉस्को सचमुच क़रीब आएगा।
इस्लामाबाद में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन की बैठक से पाकिस्तान को बड़ी उम्मीदें हैं। अगर राष्ट्रपति पुतिन आते हैं, तो पाकिस्तान इसे इलाक़े की राजनीति का बड़ा मोड़ मानेगा। निगाह रक्षा सहयोग पर है, और मध्य एशिया व ईरान से होकर मॉस्को तक रेल गलियारे पर भी।
राणा आंकड़ों से इस उम्मीद को ज़मीन पर ले आते हैं। पाकिस्तान और रूस का आपसी व्यापार 50 करोड़ डॉलर से भी कम है, जबकि भारत और रूस का लगभग 69 अरब डॉलर। रक्षा के मामले में फ़ासला और बड़ा है। भारत के साथ रूस का सैन्य रिश्ता दशकों पुराना और गहरा है, पाकिस्तान के साथ चुनिंदा।
उनके मुताबिक़ रूस पाकिस्तान को रणनीतिक साथी नहीं, इलाक़े में अपनी मौजूदगी बनाये रखने का ज़रिया मानता है। अफ़ग़ानिस्तान पर दोनों के हित अलग हैं, रूस भारत से रिश्ता बिगाड़ना नहीं चाहेगा, और पाकिस्तान का झुकाव अमेरिका की तरफ़ भी है।
लेख एक दिलचस्प सवाल पर ख़त्म होता है: अगर भारत और पाकिस्तान अमन से रहने का फ़ैसला कर लें, तो इलाक़े का सारा हिसाब ही बदल जाएगा।
ये सार देशकाल का अपना लेखन है। मूल लेख के सारे अधिकार Dawn के पास हैं।