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शरणार्थियों का बजट घटा, बेघरों की मुश्किल बढ़ी

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के पैसों में भारी कटौती से क्लिनिक, प्रसूति वार्ड और बच्चों की हिफ़ाज़त के कार्यक्रम बंद हो रहे हैं।

मूल: संपादकीय, Dawn, 4 अक्टूबर 2026
कोलाज: देशकाल

दुनिया में अपने घर से उजड़े लोगों की तादाद 2025 के आख़िर तक क़रीब 11.8 करोड़ हो गयी थी। ठीक उसी दौर में उनकी मदद करने वाली एजेंसी UNHCR का बजट सिकुड़ता गया।

Dawn के संपादकीय के मुताबिक़ 2024 में एजेंसी के पास 5.2 अरब डॉलर थे, 2025 में 3.9 अरब रह गये, जबकि ज़रूरत हर साल क़रीब 8.5 अरब डॉलर की है। जुलाई 2026 के आख़िर तक ज़रूरत का सिर्फ़ 32 फ़ीसदी पैसा आया था। एजेंसी को अपने एक चौथाई से ज़्यादा, लगभग पांच हज़ार, कर्मचारी हटाने पड़े हैं।

इसका असर ज़मीन पर दिख रहा है। चाड में शरणार्थियों के क्लिनिक और प्रसूति वार्ड बंद हुए हैं। इथियोपिया के कुछ इलाक़ों में बच्चों की सुरक्षा के कार्यक्रम 85 फ़ीसदी तक सिमट गये हैं। सूडान में यौन हिंसा झेल चुकी औरतों और बच्चों की मदद पर तलवार लटक रही है।

पाकिस्तान के लिए ये सीधा मसला है, जहां सात लाख से ज़्यादा पंजीकृत अफ़ग़ान शरणार्थी रहते हैं।

अख़बार की दलील है कि आज की ये बचत कल के बड़े संकट की नींव है। अमीर दानदाता देश ज़्यादा दें, और बोझ बराबरी से बांटा जाए।

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ये सार देशकाल का अपना लेखन है। मूल लेख के सारे अधिकार Dawn के पास हैं।