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पर्यावरण

रूस के बूढ़े परमाणु संयंत्र: इन्हें बंद करने का बिल कौन भरेगा?

एक जलवायु कार्यकर्ता चेताते हैं कि रूस दुनिया भर में रिएक्टर बेच रहा है, पर अपने घर के पुराने रिएक्टरों का हिसाब टाल रहा है।

मूल: आर्शक माकिचयान, Al Jazeera, 4 अक्टूबर 2026
कोलाज: देशकाल

दुनिया रूस के परमाणु हथियारों की धमकी पर बात करती है, पर एक और ख़तरा चुपचाप बढ़ रहा है: रूस के अपने बूढ़े परमाणु बिजलीघर। सरकारी कंपनी के 35 रिएक्टर बंद होने की क़तार में हैं। इन्हें सुरक्षित बंद करने का अनुमानित ख़र्च 21 अरब यूरो है, और इसमें से 18.7 अरब यूरो का इंतज़ाम ही नहीं।

सोवियत दौर का क़रीब 7.7 लाख घन मीटर रेडियोधर्मी कचरा पहले से पड़ा है, और इन रिएक्टरों से 8 लाख घन मीटर और निकलेगा। दूसरे देशों का अनुभव डराता है। लिथुआनिया के एक संयंत्र पर 2020 तक 3.3 अरब यूरो ख़र्च हो चुके थे और काम आधा भी नहीं हुआ था। जर्मनी में एक संयंत्र का ख़र्च एक से बढ़ कर दस अरब यूरो हो गया।

लेखक के मुताबिक़ रूस महंगे चरणों को लंबे भंडारण के नाम पर टाल रहा है। जंग के ख़र्च ने पर्यावरण का बजट खा लिया है और स्वतंत्र निगरानी करने वालों को दबा दिया गया है। वे याद दिलाते हैं कि 1957 की मायक दुर्घटना को सोवियत सरकार ने 32 साल तक छिपाये रखा था।

उनका सुझाव है कि जिन देशों में रूस परमाणु परियोजनाएं बना रहा है, वे अपनी आपात योजना तैयार रखें और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ये सवाल उठायें।

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ये सार देशकाल का अपना लेखन है। मूल लेख के सारे अधिकार Al Jazeera के पास हैं।