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नंदीग्राम का उपचुनाव: मैदान एक, खिलाड़ी लगभग अकेला

बंगाल में सत्ता बदलने के पांच महीने बाद हो रहे इस उपचुनाव में विपक्ष के पोस्टर ढूंढे नहीं मिलते, पर पुलिस के ख़िलाफ़ शिकायतें हर तरफ़ हैं।

मूल: अनंत गुप्ता, Scroll, 5 अक्टूबर 2026
कोलाज: देशकाल

6 अक्टूबर को नंदीग्राम में उपचुनाव है। रिपोर्ट के मुताबिक़ ये सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की थी, और राज्य में भाजपा की सरकार बने अभी पांच महीने हुए हैं। भाजपा ने हसीरानी रथ को उतारा है, जो एक मारे गये राजनीतिक सहयोगी की मां हैं। सामने कांग्रेस के मिलन प्रधान और भाकपा के शांति गोपाल गिरि हैं।

Scroll के रिपोर्टर ने ज़मीन पर एकतरफ़ा मुक़ाबले की तस्वीर देखी। सड़कों पर भाजपा के झंडे-बैनर छाये हैं। कांग्रेस का प्रचार एक ई-रिक्शा पर चल रहा है, जिसकी आवाज़ भाजपा की लाउडस्पीकर लगी गाड़ी के आगे दब जाती है। तृणमूल के ज़्यादातर कार्यकर्ता पाला बदल चुके हैं।

विपक्ष के आरोप गंभीर हैं: पुराने मुक़दमे खोल कर कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना, पोलिंग एजेंटों पर झूठे केस, और भाकपा उम्मीदवार पर हमला। भाजपा उम्मीदवार इन बातों को हंसी में उड़ा देती हैं, उनके मुताबिक़ विपक्ष को ढूंढने के लिए दूरबीन चाहिए।

सबसे दिलचस्प आवाज़ें मतदाताओं की हैं। एक मुसलमान मतदाता व्यावहारिक हिसाब से सत्ता वाली पार्टी के साथ जाने की बात करते हैं, एक बुज़ुर्ग हिंदू महिला पिछली सरकार से ऊब चुकी हैं। ज़्यादातर लोग मान चुके हैं कि नतीजा पहले से तय है।

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ये सार देशकाल का अपना लेखन है। मूल लेख के सारे अधिकार Scroll के पास हैं।